पूर्णम कुमार शॉ: एक सिपाही की वापसी और भारत की कूटनीतिक जीत

बीएसएफ कांस्टेबल पूर्णम कुमार शॉ, जो पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के निवासी हैं, 23 अप्रैल 2025 को पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में ड्यूटी के दौरान गलती से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान की सीमा में चले गए थे। पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें हिरासत में ले लिया, और वे लगभग तीन सप्ताह तक पाकिस्तान की कस्टडी में रहे।

इस घटना के बाद, भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया, विशेषकर पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण। हालांकि, भारत सरकार ने कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से पाकिस्तान पर दबाव बनाया। इस दौरान, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पूर्णम की पत्नी रजनी शॉ से बात कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

14 मई 2025 को सुबह 10:30 बजे, अटारी-वाघा सीमा पर पाकिस्तान ने पूर्णम कुमार शॉ को भारत को सौंप दिया। यह हैंडओवर शांतिपूर्ण तरीके से और निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत किया गया।

इस घटना ने भारत की कूटनीतिक ताकत और अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाया। पूर्णम की सुरक्षित वापसी से उनके परिवार, विशेषकर उनकी गर्भवती पत्नी रजनी, को immense relief मिला। यह घटना दर्शाती है कि भारत अपने जवानों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करता है, चाहे वह कूटनीतिक हो या सैन्य।

इस घटना के बाद, भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक सकारात्मक कदम देखा गया, जब दोनों देशों ने अपने-अपने हिरासत में लिए गए सैनिकों की अदला-बदली की।

पूर्णम कुमार शॉ की वापसी न केवल उनके परिवार के लिए खुशी का कारण है, बल्कि यह भारत की कूटनीतिक सफलता और अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है।

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